Question 11 of 11intermediate💡 UnderstandLong Answer5 marks

मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।

Correct Answer

बिस्मिल्ला खाँ का मुहर्रम से गहरा जुड़ाव रहा है, जो काशी की गंगा-जमुनी संस्कृति का जीता-जागता प्रमाण है। उनके लिए मुहर्रम केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक था।

काशी में बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ जिस प्रकार एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, ठीक उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की संस्कृति भी एक-दूसरे की पूरक रही है। यह उनकी मिली-जुली संस्कृति को दर्शाता है।

बिस्मिल्ला खाँ हमेशा से दो कौमों को एक होने और आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देते रहे। वे एक सच्चे सुर साधक थे, जिनकी फूंक में अजान की तासीर उतरती थी और जो खुदा से एक ऐसे सुर की याचना करते थे जिससे आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।

इस प्रकार, मुहर्रम से उनका यह जुड़ाव उनकी धर्मनिरपेक्ष सोच का परिचायक है। उनकी शहनाई की मंगलध्वनि और संगीत किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थे, बल्कि पूरी मानवता को एक सूत्र में बाँधते थे।

Exercise: रचना और अभिव्यक्ति | Q: 9 | (Chapter: 87)
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Explanation

पाठ्यपुस्तक के अनुसार, बिस्मिल्ला खाँ का मुहर्रम से जुड़ाव काशी की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। जिस प्रकार बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक-दूसरे के पूरक हैं, वैसे ही मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर-गुलाल एक-दूसरे के पूरक हैं। बिस्मिल्ला खाँ हमेशा दोनों कौमों के बीच एकता और भाईचारे की प्रेरणा देते रहे, जो उनके मिली-जुली संस्कृति वाले व्यक्तित्व को दर्शाता है।