Question 3 of 14advanced⚖️ EvaluateLong Answer5 marks

"कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।" इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?

Correct Answer

दिए गए कथन के आधार पर आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में अत्यंत महत्वपूर्ण और मूलभूत भूमिका है। ये आम जनता समाज से कितना कम लेकर उसे कितना अधिक वापस लौटा देती है, यही इनकी सबसे बड़ी ताकत है।

देश की आम जनता केवल जनता नहीं, बल्कि जीवन का प्रति संतुलन है। ये वे लोग हैं जो जिंदगी की सारी मलाई दूसरों को दे देते हैं और स्वयं अभाव, यातना और वंचना के आँसू पीते हैं। पहाड़ों को तोड़ने वाली श्रम-सुंदरियों की तरह ये कठिन से कठिन श्रम का भार उठाते हैं।

ये आम लोग 'वेस्ट एट रिपेरिंग' हैं, अर्थात् ये समाज की टूट-फूट और क्षति को ठीक करते हैं। पहाड़ों में रास्ते बनाने से लेकर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने तक में इनका अहम योगदान होता है। इनके द्वारा किए गए कठिन श्रम का आर्थिक लाभ समाज और देश को मिलता है।

इसके बावजूद इन्हें बदले में बहुत कम मिलता है। ये थोड़े से वेतन या संसाधनों पर जीवन यापन करते हैं, लेकिन अपने श्रम से देश की अर्थव्यवस्था को बल देते हैं।

इनकी यह मेहनत और त्याग ही देश की आर्थिक प्रगति का आधार है। इनके भीतर इतनी जीवन शक्ति है कि अभावों के बीच भी ये इस कदर खिलखिलाकर हँस पड़ती हैं कि खंडहर भी ताजमहल बन जाता है। इस प्रकार आम जनता ही देश की असली धरोहर और आर्थिक प्रगति की नींव है।

Exercise: प्रश्न-अभ्यास | Q: 11 | (Chapter: 23)
For More Understanding

Explanation

The question asks for the role of the common public in the country's economic progress based on the specific quote from the chapter 'साना-साना हाथ जोड़ि'. The author reflects on the stone-breaking women in the hills, realizing that while they endure immense hardship and receive very little (low wages, torn clothes), their hard labor contributes massively to society and the nation's infrastructure. They are termed as 'जीवन का प्रति संतुलन' (balance of life) and 'वेस्ट एट रिपेरिंग' (repairing the waste/damage), indicating they bear the brunt of the struggle yet give back significantly, forming the true foundation of economic progress.