हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंत: व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है यह आप कैसे कह सकते हैं?
हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंत: और बाह्य दोनों दबावों का परिणाम है। एक ओर उसमें लेखक की आंतरिक विवशता और आकुलता है, तो दूसरी ओर बाहरी घटना का गहरा प्रभाव।
आंतरिक दबाव के रूप में, लेखक ने हिरोशिमा की विभीषिका को अपने भीतर गहराई से महसूस किया। जब उसने जले पत्थर पर छाया देखी, तो लगा जैसे थप्पड़ लगा हो। उस क्षण अणु-विस्फोट उसके अनुभूति-प्रत्यक्ष में आ गया और वह स्वयं विस्फोट का भोक्ता बन गया। भीतर की आकुलता बुद्धि के क्षेत्र से बढ़कर संवेदना के क्षेत्र में आ गई। लेखक इस आभ्यंतर विवशता से मुक्ति पाने के लिए, तटस्थ होकर उसे पहचानने के लिए लिखता है।
बाह्य दबाव के रूप में, हिरोशिमा का भयानक इतिहास, वहाँ का भ्रमण और सड़क पर जले हुए पत्थर पर व्यक्ति की उजली छाया देखना शामिल है। यह बाहरी दृश्य लेखक के भीतरी उन्मेष का निमित्त बन गया। लेखक स्वयं कहता है कि कभी-कभी बाहर का दबाव वास्तव में दबाव नहीं रहता, बल्कि वह भीतरी प्रेरणा का कारण बन जाता है।
इस प्रकार, हिरोशिमा की बाहरी त्रासदी ने लेखक की आंतरिक संवेदनाओं को झकोड़ा, जिससे दोनों दबावों के मिश्रण से वह कविता रचित हुई।
Explanation
The question asks how the Hiroshima poem is a result of both internal and external pressures. The textbook context clearly shows that the author experienced an internal compulsion (आभ्यंतर विवशता) and turmoil (आकुलता) where he felt like a victim of the explosion himself (अनुभूति-प्रत्यक्ष). This represents the internal pressure. The external pressure includes the actual historical tragedy of Hiroshima and the sight of the shadow on the burned stone, which acted as a trigger (निमित्त) for his internal inspiration. The author explicitly mentions that external pressures can become the cause for internal inspiration, thus making the poem a result of both.