"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।" इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए?
बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए:
परोपकार की भावना - दूसरों की सहायता करना। उदारता - अपने पास से दूसरों को देना। विनम्रता - बड़े होने पर भी विनम्र रहना।
सेवाभाव - समाज की सेवा करना। दयालुता - दूसरों के प्रति करुणा रखना। सत्यनिष्ठा - सत्य का साथ न छोड़ना।
खजूर का पेड़ बड़ा होने पर भी यात्रियों को छाया नहीं देता और उसके फल दूर होते हैं।
इसी प्रकार व्यक्ति को बड़े होने के साथ-साथ दूसरों के उपयोगी बनना चाहिए।
Explanation
पाठ में कबीर ने खजूर के पेड़ का उदाहरण देकर यह बताया है कि केवल बड़ा होना पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को अपनी उपयोगिता बनाए रखनी चाहिए और दूसरों के काम आना चाहिए।
Solution Steps
परोपकार की भावना - दूसरों की सहायता करना
उदारता - अपने पास से दूसरों को देना
विनम्रता - बड़े होने पर भी विनम्र रहना
सेवाभाव - समाज की सेवा करना
दयालुता - दूसरों के प्रति करुणा रखना
सत्यनिष्ठा - सत्य का साथ न छोड़ना