आपने जो यात्रा-वर्णन पढ़ा है, इसे भारतेंदु हरिश्चंद्र ने एक संपादक को पत्र के रूप में लिखकर भेजा था। आप भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित को पत्र लिखकर बताइए।
पत्र लेखन का प्रारूप:
[स्थान] [दिनांक]
प्रिय मित्र/माता जी/पिता जी,
सस्नेह नमस्कार!
मैं यह पत्र [स्थान] से लिख रहा/रही हूँ। हाल ही में मैं [यात्रा स्थान] की यात्रा पर गया/गई था/थी। यह यात्रा मेरे लिए बहुत यादगार रही।
[यात्रा स्थान] की प्राकृतिक सुंदरता अद्भुत थी। वहाँ के [विशेष आकर्षण - पहाड़, नदी, मंदिर आदि] ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैंने वहाँ [गतिविधियाँ - स्नान, पूजा, भ्रमण आदि] की।
वहाँ का वातावरण [शांत/पवित्र/सुंदर] था। मुझे वहाँ [अनुभव/भावना] का अनुभव हुआ।
मैं इस यात्रा से बहुत प्रसन्न हूँ और आपको भी वहाँ जाने की सलाह दूँगा/दूँगी।
आशा है आप स्वस्थ होंगे।
आपका मित्र/पुत्र/पुत्री [नाम]
Explanation
यह एक पत्र लेखन प्रश्न है। विद्यार्थियों को अपनी किसी यात्रा के बारे में परिचित को पत्र लिखना है। पाठ में दिए गए पत्र की शैली को ध्यान में रखकर पत्र लिखना है।