पंक्तियों पर चर्चा: "मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।"
इस पंक्ति से पता चलता है कि मेजर ध्यानचंद में अद्भुत खेल भावना थी।
वे खुद गोल करने के बजाय अपने साथी खिलाड़ियों को अवसर देते थे ताकि उन्हें भी गोल करने का श्रेय मिले। यही कारण है कि दुनिया भर के खेल प्रेमियों ने उनका दिल जीत लिया।
उनकी यह खेल भावना उन्हें एक महान खिलाड़ी बनाती है।
Explanation
पाठ में मेजर ध्यानचंद ने स्वयं बताया है कि वे हमेशा अपने साथियों को गोल करने का अवसर देते थे। इससे उनकी टीम स्पिरिट और खेल भावना का पता चलता है।
Solution Steps
मेजर ध्यानचंद में अद्भुत खेल भावना थी
वे साथी खिलाड़ियों को गोल करने का अवसर देते थे
दुनिया भर के खेल प्रेमियों ने उनका दिल जीता
उनकी खेल भावना उन्हें महान खिलाड़ी बनाती है